गर आप 90 के दशक की उन फिल्मों के फैन हैं जहाँ प्यार का मतलब पागलपन और हर सीन में ज़बरदस्त ड्रामा होता था, तो यह फिल्म आपके लिए ही बनी है। हर्षवर्धन राणे और सोनम बाजवा की यह फिल्म प्यार और जुनून की एक ऐसी कहानी है जो आपको पुरानी यादों में ले जाएगी। 🍿
कहानी: क्या यह वाकई प्यार है? 👔
फिल्म की कहानी शुरू होती है विक्रमादित्य भोसले (हर्षवर्धन राणे) से, जो एक ताकतवर नेता का बेटा है। उसे हर चीज़ अपनी मर्जी से हासिल करने की आदत है। उसकी ज़िंदगी तब बदल जाती है जब उसकी नज़र सुपरस्टार एक्ट्रेस अदा रंधावा (सोनम बाजवा) पर पड़ती है।
विक्रम को पहली नज़र में अदा से प्यार हो जाता है, लेकिन यह प्यार बहुत जल्द एक खतरनाक दीवानगी में बदल जाता है। विक्रम अदा को पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है, जबकि अदा अपनी आज़ादी और करियर को बचाने की कोशिश करती है। यह कहानी प्यार की नहीं, बल्कि एक तरफ़ा जुनून और उसके अंजाम की है।
फिल्म की खूबियाँ: क्यों देखें? 🌟
इस फिल्म (Ek Deewane Ki Deewaniyat Review) की सबसे बड़ी जान इसकी केमिस्ट्री है। हर्षवर्धन राणे ‘सनम तेरी कसम’ के बाद एक बार फिर इंटेंस लवर के रोल में छा गए हैं। वहीं सोनम बाजवा ने अपनी सादगी और अदाकारी से फिल्म में जान फूँक दी है। दोनों को स्क्रीन पर साथ देखना एक अच्छा अनुभव है। 🔥
फिल्म का संगीत इसकी सबसे बड़ी ताकत है। ‘मेरा हुआ’ और फिल्म के बाकी गाने इतने सुरीले हैं कि आप इन्हें बार-बार सुनना चाहेंगे। अगर आपको म्यूजिकल फिल्में पसंद हैं, तो यह आपको निराश नहीं करेगी।
फिल्म का बैकग्राउंड संगीत और एडिटिंग इतनी जानदार है कि हर सीन सीधा दिल पर चोट करता है। तकनीकी रूप से यह फिल्म एक मास्टरपीस है जो आपको अंत तक कुर्सी से बांधे रखती है 🎶
‘एक दीवाने की दीवानियत’ महज़ एक फिल्म नहीं, बल्कि उन टूटे हुए दिलों की चीख है जो प्यार और पागलपन के बीच की धुंधली लकीर पर खड़े हैं। अगर आप मुझसे पूछें, तो यह फिल्म हर उस शख्स के लिए एक आईना है जिसने कभी किसी को अपनी जान से ज़्यादा चाहा है।
क्या यह सही है कि हम जिसे चाहें उसे अपनी जागीर समझ लें? फिल्म इसी चुभते हुए सवाल को हमारे सामने छोड़ जाती है। यह कहानी हमें बताती है कि ‘दीवानगी’ पर्दे पर तो खूबसूरत लग सकती है, लेकिन असल ज़िंदगी में यह किसी की रूह को छलनी कर देती है। अगर आप भावनाओं के उस सैलाब को महसूस करना चाहते हैं जहाँ प्यार दर्द बन जाता है, तो इस फिल्म को अपनी ‘मस्ट-वॉच’ लिस्ट में ज़रूर रखें। यह आपको रुलाएगी भी, डराएगी भी और शायद प्यार को देखने का आपका नज़रिया हमेशा के लिए बदल देगी।
कमियाँ: कहाँ रह गई कसर? ⚖️

फिल्म का कुछ हिस्सा काफी पुराना और थोड़ा ‘अजीब’ लग सकता है। कभी-कभी हीरो का व्यवहार प्यार से ज़्यादा ‘स्टॉकिंग’ (पीछा करना) जैसा लगता है, जो आज के दौर में शायद सबको पसंद न आए। फिल्म में ड्रामे को दिखाने के लिए बहुत ज़्यादा ‘स्लो-मोशन’ और भारी-भरकम डायलॉग्स का इस्तेमाल किया गया है।
फैमिली के साथ देखें या नहीं? (Family Verdict) 👨👩👧👦
यहाँ सबसे ज़रूरी बात—क्या यह बच्चों के साथ देखी जा सकती है? इसका जवाब है: नहीं। 🚫
इस फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट मिला है। फिल्म में जुनून, मानसिक तनाव और कुछ हिंसक दृश्य हैं जो छोटे बच्चों के लिए सही नहीं हैं। यह फिल्म दोस्तों के साथ या पार्टनर के साथ देखने के लिए ज़्यादा बेहतर है।
फैसला: देखें या छोड़ दें? 🤔
- ज़रूर देखें अगर: आप हर्षवर्धन राणे के फैन हैं, आपको पुरानी स्टाइल की इमोशनल फिल्में पसंद हैं और आप बेहतरीन गानों के शौकीन हैं। 🎟️
- छोड़ सकते हैं अगर: आपको लॉजिक वाली कहानियाँ पसंद हैं या आप ऐसी फिल्में पसंद नहीं करते जहाँ प्यार के नाम पर ज़बरदस्ती दिखाई जाए।
हमारी रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3/5 स्टार) — शानदार एक्टिंग और गानों के लिए एक बार देखी जा सकती है।
तकनीकी बारीकियां (Technical Details)
बैकग्राउंड स्कोर (Background Score): फिल्म का संगीत सिर्फ गानों तक सीमित नहीं है। इसका बैकग्राउंड स्कोर कहानी के ‘जुनून’ को और गहरा बनाता है। जब विलेन या हीरो की एंट्री होती है, तो तेज़ और रोंगटे खड़े कर देने वाला संगीत माहौल को पूरी तरह बदल देता है। 🎻
एडिटिंग (Editing): फिल्म की एडिटिंग काफी शार्प है, खासकर एक्शन और थ्रिलर सीन्स में। कहानी की रफ़्तार को बनाए रखने के लिए कट्स का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर किया गया है, ताकि दर्शक कहीं भी बोर न हों। ✂️
सिनेमैटोग्राफी (Cinematography): फिल्म के विजुअल्स बहुत ही ग्रैंड हैं। लाइटिंग और कैमरा एंगल्स इस तरह रखे गए हैं कि हर फ्रेम एक पेंटिंग जैसा लगता है।
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